असाधारण और अभूतपूर्व

कुशलता क्या ऐसे राहगीर की

कुशलता क्या ऐसे राहगीर की,  जिसकी राहों में शूल न हो। संगत भी क्या ऐसे गुरु की,  जिसके अपने उसूल न हो। कठिन राह पर

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गुरु पूर्ण विस्तार प्रत्येक को जो सुनने आया है अपना ही जानते हैं

ये विश्व अश्रद्धा पर आधारित है जहाँ कोई किसी पर भरोसा यानी श्रद्धा नहीं करता है । ऐसे में गुरु पूर्ण विस्तार प्रत्येक को जो

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